क्या मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टर प्राइवेट क्लीनिक चला सकते हैं?
मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के प्राइवेट क्लीनिक चलाने या प्राइवेट प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं है। यदि वे नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) ले रहे हैं, तो निजी प्रैक्टिस करना सेवा नियमों का उल्लंघन है और अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में, नियमानुसार विशेष अनुमति के साथ वे ड्यूटी के घंटों के बाद काम कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों के निजी अभ्यास से संबंधित मुख्य नियम:-
अनुमति अनिवार्य: निजी क्लिनिक या अस्पताल में प्रैक्टिस के लिए सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति अनिवार्य है।
NPA का नियम: यदि डॉक्टर Non-Practising Allowance (NPA) प्राप्त कर रहे हैं, तो वे निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकते।
नियमों का उल्लंघन: बिना अनुमति के क्लीनिक चलाने पर नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई और लाइसेंस रद्द हो सकता है।
उपकरणों पर रोक: सरकारी डॉक्टर अपने निवास पर एक्स-रे, यूएसजी, ईको जैसी जांच मशीनें नहीं रख सकते।
हालिया बदलाव (2024): सरकार ने डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए निजी डॉक्टरों को भी सरकारी अस्पतालों में काम करने की अनुमति दी है।
अब आप बताएं सिंगरौली में कौन कौन से हॉस्पिटल और क्लिनिक जिले के सरकारी डॉक्टरों के प्रत्यक्ष भूमिका में चलाए जा रहे हैं?
अब सिंगरौली की जनता और शासन पर निर्भर करता है कि वो मेडिकल क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ़ कार्यवाही करने में कितने सक्षम हैं?
@cmmohanyadav
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