कानपुर का आहूजा हॉस्पिटल बना ‘किडनी मंडी’: रसूख की आड़ में दो साल से चल रहा था अवैध ट्रांसप्लांट रैकेट
कानपुर (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित केशवपुरम का आहूजा हॉस्पिटल अब एक बड़े स्वास्थ्य घोटाले के केंद्र के रूप में सामने आया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यहां करीब दो वर्षों से बिना अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध कारोबार चल रहा था। इस पूरे नेटवर्क में बाहरी राज्यों से मरीजों और डोनरों को लाकर गुपचुप तरीके से ऑपरेशन किए जाते थे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अस्पताल को किडनी प्रत्यारोपण या यूरोलॉजी से संबंधित किसी भी सर्जरी की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद यहां ऑपरेशन थियेटर का इस्तेमाल कर अवैध ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इस साल 3 मार्च को साउथ अफ्रीका की एक महिला का भी यहां अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया गया, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अस्पताल में दर्ज नहीं मिला।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद क्राइम ब्रांच, एलआईयू और खुफिया एजेंसियों को सक्रिय किया गया। लंबी निगरानी और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आरोपियों तक पहुंच बनाई गई और उन्हें दबोच लिया गया। जांच में अब तक कम से कम सात अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के मामले सामने आ चुके हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि मरीजों को अलग-अलग नर्सिंग होम्स के जरिए एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता था, ताकि संदेह न हो। ऑपरेशन के बाद मरीजों को कानपुर से दिल्ली और नोएडा के निजी अस्पतालों में ले जाकर इलाज कराया जाता था। इस पूरे खेल में शहर के कई नर्सिंग होम्स और मेडिकल स्टाफ के जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले की मुख्य आरोपी डॉ. प्रीति आहूजा का प्रोफाइल भी बेहद प्रभावशाली रहा है। वह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात हैं और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की नगर शाखा की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इसके अलावा वह कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन की सचिव और फिजिशियन फोरम की सदस्य हैं। चिकित्सा जगत में उनकी सक्रिय भागीदारी और पहचान के चलते इस पूरे रैकेट को लंबे समय तक संरक्षण मिलता रहा।
अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की नजर उन डॉक्टरों पर भी है, जिन्होंने ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों का इलाज किया और इस अवैध गतिविधि की जानकारी होने के बावजूद उसे उजागर नहीं किया। ऐसे सभी डॉक्टरों से पूछताछ की जाएगी।
यह मामला न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह प्रभाव और नेटवर्क के दम पर गंभीर अपराध लंबे समय तक छिपे रह सकते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
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