अश्विनी वैष्णव ने सूचनाओं के सत्यापन पर दिया जोर, बोले— भरोसे की संस्थाओं पर टिका है मानव समाज
नई दिल्ली (आरएनआई)। डिजिटल मीडिया के दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका और जिम्मेदारी पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूरा मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर आधारित है। डीएनपीए कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और वायरल कंटेंट की होड़ के बीच तथ्यात्मक, प्रामाणिक और सत्यापित सूचनाओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत के शीर्ष प्रकाशक समूहों की डिजिटल इकाइयों के संगठन डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव में डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समय सही निर्णय लेने का है, ताकि आम सहमति के आधार पर अच्छी सिफारिशें तैयार हों और भविष्य की नीतियों को दिशा मिल सके।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भरोसा परिवार से शुरू होकर समाज की पहचान, न्यायपालिका, विधायिका और मीडिया जैसी संस्थाओं तक जाता है। मीडिया संस्थानों के लिए निष्पक्षता और जिम्मेदारी बुनियादी सिद्धांत हैं, लेकिन आज उनके सामने डीप फेक, गलत सूचना और सिंथेटिक कंटेंट जैसी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं सदियों से समाज का आधार रही हैं, उन्हें इन खतरों से सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। इसके लिए ऑनलाइन सेफ्टी, खबरों की प्रामाणिकता, बच्चों की सुरक्षा और भ्रामक कंटेंट से बचाव पर ठोस कदम उठाने होंगे।
केंद्रीय मंत्री ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सत्यापन की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि जैसे किसी होटल में ठहरने वाले व्यक्ति का सत्यापन किया जाता है, उसी तरह डिजिटल मंचों को भी कंटेंट और यूजर्स के सत्यापन पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ ही घंटों में कंटेंट का वायरल हो जाना बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है, इसलिए नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
निष्पक्ष रेवेन्यू शेयरिंग पर भी जोर
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि संसदीय समितियां और न्यायपालिका भी ऑनलाइन खतरों को लेकर चिंतित हैं। यूजर्स की शिकायतों को सुनने और उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को रेवेन्यू निष्पक्ष तरीके से साझा करना चाहिए—चाहे वह पारंपरिक मीडिया, कंटेंट क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स या शोधार्थियों से जुड़ा हो। जिनके पास मौलिक कंटेंट और कॉपीराइट है, वह उनकी बौद्धिक संपदा है और उसका सम्मान समाज के विकास के लिए अनिवार्य है।
तन्मय माहेश्वरी बोले— कंटेंट माफिया की तरह काम कर रहीं कई कंपनियां
कॉन्क्लेव में समूह के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में कंटेंट ही इंजन का “ऑयल” है। हाल में हुई एआई समिट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई कंपनियां ऐसी हैं जो दूसरों के कंटेंट को अपने एल्गोरिदम में इस्तेमाल कर रही हैं और कंटेंट माफिया की तरह व्यवहार कर रही हैं। उन्होंने जिम्मेदार और समन्वित प्रयासों के जरिए डिजिटल मीडिया के भविष्य को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)