अमौसा के मेले में आस्था और संतोष का संगम, स्नान के बाद प्रसाद-दान कर श्रद्धालु लौटे घर
प्रयागराज (आरएनआई)। अमौसा के मेले में इस बार श्रद्धा के साथ संतुष्टि का भाव साफ नजर आया। मौनी अमावस्या के बाद दूसरे दिन भी गंगा और त्रिवेणी संगम पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। स्नान के बाद भक्तों ने बड़े हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन किया और घाटों पर पुरोहितों व गुरु शिविरों में वस्त्र-अन्न के साथ गोदान किया।
मेले के विभिन्न भंडारों में श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। कई लोग रामकथा और भागवत कथा का श्रवण करते नजर आए, तो कई श्रद्धालु प्रमुख संतों के शिविरों में जाकर आशीर्वाद लेते दिखे। खाक चौक और परेड क्षेत्र की ओर श्रद्धालुओं का दबाव सबसे अधिक रहा।
स्नान कर लौट रहे श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष और उल्लास साफ दिखाई दिया। रीवा से गांव वालों के साथ आई रमइया देवी ने बताया कि संगम में डुबकी लगाकर वे स्वयं को धन्य महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने साथ गंगा जल ले जा रही हैं, जिसे घर जाकर परिवार के सदस्यों को पिलाएंगी। मेले से लौटने वाले लगभग हर श्रद्धालु के हाथ में गंगा जल की बोतल दिखाई दी।
त्रिवेणी रोड और परेड क्षेत्र में बिंदी, सिंदूर, धागा और माला बेचने वालों की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ रही। कानपुर के यशोदा नगर से आए श्यामू अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ पहली बार मेले में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वे यहां से प्रसाद के रूप में गंगा जल और सिंदूर ले जा रहे हैं।
दोपहर बाद जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु वापसी के लिए निकले तो पीपा पुलों और स्टेशन-बस अड्डों की ओर जाने वाले मार्गों पर जाम जैसी स्थिति बन गई। दारागंज, जीटी जवाहर, नागवासुकि, अलोपीबाग, बैरहना और कीडगंज के मिंटो पार्क क्षेत्र में ई-रिक्शा और तिपहिया वाहनों पर बैठने की होड़ लगी रही, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में प्रशासनिक प्रयासों से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकी।
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