संविधान ‘वी द पीपल’ से शुरू होता है, भारत माता से नहीं: ओवैसी ने धर्म से देशभक्ति जोड़ने पर उठाए सवाल
हैदराबाद (आरएनआई)। भारतीय संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भारतीय संविधान की शुरुआत “वी द पीपल” यानी जनता से होती है, न कि भारत माता के नाम से। उन्होंने संविधान की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भावना पर जोर देते हुए कहा कि देशभक्ति को किसी एक धर्म से जोड़ना सही नहीं है।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और इसकी बुनियाद स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व जैसे मूल्यों पर टिकी है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावना स्पष्ट रूप से यह बताती है कि भारत का संवैधानिक ढांचा धर्मनिरपेक्ष है और इसमें हर नागरिक की आस्था का सम्मान किया गया है। उनके अनुसार राष्ट्र प्रेम को किसी धार्मिक पहचान से जोड़ना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
ओवैसी ने संसद में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने सदन में स्पष्ट किया था कि 24 जनवरी 1950 को देश ने खुद को संविधान दिया, जिसकी शुरुआत “वी द पीपल” से होती है। उनके मुताबिक संविधान किसी धार्मिक प्रतीक का नाम लेकर शुरू नहीं होता, बल्कि जनता को सर्वोच्च मानता है।
उन्होंने अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। यही भारत की संवैधानिक ताकत है। ओवैसी ने कहा कि जब देशभक्ति को किसी एक धर्म से जोड़ा जाता है, तो यह आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले कई नेताओं और उनके बलिदानों को कमजोर करता है।
एआईएमआईएम प्रमुख ने बहादुर शाह जफर और यूसुफ मेहरअली जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने भी देश के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिया। उनके अनुसार राष्ट्र प्रेम किसी एक धार्मिक पहचान का मोहताज नहीं हो सकता और इसे उसी व्यापक और समावेशी नजरिए से देखा जाना चाहिए, जैसा भारतीय संविधान सिखाता है।
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