आधार की अड़चन में अटका इलाज: दिल की मरीज रूबी तीन साल से सिस्टम के भरोसे
मध्यप्रदेश के गुना जिले की 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली रूबी अहिरवार की जिंदगी इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसकी सबसे बड़ी लड़ाई बीमारी से कम और सिस्टम से ज्यादा है। रूबी के दिल में छेद है और डॉक्टरों ने समय रहते इलाज जरूरी बताया है, लेकिन पिछले तीन साल से उसका निरस्त आधार कार्ड उसके इलाज के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन गया है।
गरीब किसान परिवार से आने वाली रूबी पढ़ाई में आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन उसकी बीमारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता ने उसके सपनों को थाम दिया है। उसके पिता धनराम अहिरवार गुना से लेकर भोपाल और दिल्ली तक कई बार दफ्तरों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन आधार कार्ड की समस्या आज तक हल नहीं हो पाई। हर बार नई प्रक्रिया, तकनीकी कारण और फाइलों में उलझी प्रक्रिया उनके सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती है।
रूबी की बीमारी का पता तब चला जब वह कक्षा 9वीं में बमोरी के सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। स्वास्थ्य जांच के दौरान डॉक्टरों ने उसके दिल में छेद होने की पुष्टि की थी। समय बीतता गया, रूबी अब 11वीं में पहुंच गई है, लेकिन इलाज आज भी शुरू नहीं हो सका। उसकी हालत वहीं की वहीं बनी हुई है, जबकि कागजी प्रक्रियाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
आयुष्मान भारत जैसी योजना, जिसका उद्देश्य गरीबों को मुफ्त इलाज देना है, रूबी के लिए सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। आधार कार्ड निरस्त होने के कारण उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। एक जरूरी दस्तावेज की कमी ने उसके इलाज को पूरी तरह रोक दिया है।
अपने स्तर पर हर संभव प्रयास करने के बाद अब रूबी का परिवार जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगा रहा है। उन्होंने पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया से संपर्क किया, जिसके बाद अधिकारियों से बातचीत हुई और रूबी को आधार केंद्र भेजा गया। अब परिवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उम्मीद है कि उनकी बेटी की समस्या का समाधान जल्द होगा और उसका इलाज शुरू हो पाएगा।
रूबी की आंखों में अभी भी उम्मीद है। वह सिर्फ एक सामान्य जिंदगी जीना चाहती है, पढ़ना चाहती है और ठीक होना चाहती है। लेकिन उसके और उसके इलाज के बीच आज भी एक निरस्त आधार कार्ड और जटिल प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी है।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है, जहां योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन जरूरतमंद तक उनका लाभ पहुंचाने में गंभीर खामियां सामने आती हैं। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन समय रहते इस बच्ची की मदद कर पाता है या फिर उसकी जिंदगी फाइलों के बीच ही उलझी रह जाती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)