रेवड़ी कल्चर बनाम विकास मॉडल: 18 साल की स्थिर सरकार के बाद भी कर्ज़ में डूबा मध्यप्रदेश, आर्थिक प्रगति पर उठे सवाल
मध्यप्रदेश (आरएनआई) मध्यप्रदेश में मुफ्त रेवड़ी कल्चर योजनाओं की शुरुआत करने वाले शिवराज मामा ही है।


परिणाम यह हुआ कि इसे देखकर अन्य राज्यो ने भी अनुसरण किया। जनता का एक बड़ा वर्ग ऐसी रेवड़ी योजनाओं का आदी हो चुका है। आज मध्यप्रदेश पर 4.7 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज़ है।
18 वर्ष पद पर रहने के बावजूद तथा स्थिर सरकार के बावजूद राजस्व संग्रहण के वैकल्पिक स्रोत अपेक्षानुरूप नही है। आज से 20 वर्ष पहले राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश (एवं तेलंगाना) की स्थिति भी मध्यप्रदेश से अच्छी नही थी। लेकिन आज उनमे और मध्यप्रदेश में बहुत अंतर आ गया है।

उपरोक्त डेटा देखिए।
और 20 साल पहले के बीमारू राज्यो (छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश (एवं तेलंगाना), राजस्थान, मध्यप्रदेश से आज की स्थिति में मध्यप्रदेश की तुलना छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश (एवं तेलंगाना), राजस्थान से करिए।
डाटा देखकर सच्चाई सामने नजर आएगी। आज भी ग्रामो में जाते हैं तो ज्यादातर लोग व महिलाएं शिवराज को बहुत याद करते हैं, क्योंकि उन लोगो, बहनों महिलाओं को ऐसी रेवड़ी योजनाओं की आदत पड़ चुकी है, लेकिन वही लोग उद्यम व श्रम से कन्नी काटते हैं। जिस राज्य की जनता का एक बड़ा हिस्सा सरकार की या किसी नेता की रेवड़ी योजनाओं की तारीफ करे, तो समझिये की वह राज्य एक गरीब राज्य है, और उस राज्य के उन जनवर्ग का जीवन उत्थान नही होने वाला है। शिवराज मामाजी की 18 वर्ष की स्थिर सरकार के बावजूद 2005 तक बीमारू राज्य कहे जाने वाले राज्यो (राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश (एवं तेलंगाना), मध्यप्रदेश से आज की स्थिति में मध्यप्रदेश में उद्योग विकास, सकल घरेलू उत्पाद, आयकर जमाकर्ताओं की संख्या, कृषकों की मासिक आय, की तुलना राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश (एवं तेलंगाना), से करिए। ये आंकड़े तक वर्ष 2024 के है।

डाटा देखकर सच्चाई चिंतन करिए कि क्या वास्तव में अपना राज्य मध्यप्रदेश पिछले लगभग 20 वर्षो में स्थिर बहुमत वाली सरकार का फायदा आधारभूत बुनियाद कार्यो व जनकल्याण में उठा पाया है !!!?
कम से बुद्धिजीवी वर्ग को इस पर अवश्य चिंतन करनी चाहिए। और सरकारों की आर्थिक सफलता का विश्लेषण करना चाहिए।
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