मिनी स्मार्ट सिटी का अधूरा सपना: आठ साल बाद भी विकास की राह देखता गुना
मध्यप्रदेश के गुना शहर को मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का सपना आज भी अधूरा नजर आ रहा है। वर्ष 2018 में 29 अप्रैल को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ बड़े उत्साह और उम्मीदों के साथ किया गया था, लेकिन आठ साल बीतने के बाद भी यह योजना कागजों और घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ सकी है।
इस दौरान शहर ने कई प्रशासनिक बदलाव देखे—नगर पालिका अध्यक्षों से लेकर कलेक्टरों तक—लेकिन ट्रांसपोर्ट नगर, गुनिया नदी के पुनरुद्धार और भुजरिया तालाब के संरक्षण जैसे प्रमुख मुद्दे आज भी अधर में लटके हुए हैं। शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया है, जिससे भारी वाहनों का दबाव और जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है।
हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक समीक्षा बैठक में इस परियोजना की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। हालांकि इन निर्देशों के बाद कुछ हलचल जरूर दिखी है, लेकिन वर्षों से चली आ रही देरी के कारण आम जनता को अभी तक राहत नहीं मिल सकी है।
शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली गुनिया नदी आज गंदगी और अतिक्रमण की चपेट में है और एक नाले में तब्दील होती जा रही है। इसी तरह ऐतिहासिक भुजरिया तालाब का अस्तित्व भी संकट में है, जहां बार-बार शुरू हुई सफाई और संरक्षण की योजनाएं हर बार अधूरी रह जाती हैं। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रही है।
शुभारंभ के समय तत्कालीन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी इस अवसर की साक्षी थीं और शहर के विकास को लेकर बड़े दावे किए गए थे। लेकिन वर्तमान स्थिति में गुना की जनता अब भी धूल, जाम, गंदगी और जलभराव जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है।
अब सवाल यह है कि क्या हालिया सख्ती और प्रशासनिक प्रयास इस ठहरे हुए प्रोजेक्ट को नई दिशा दे पाएंगे, या फिर मिनी स्मार्ट सिटी का यह सपना यूं ही अधूरा रह जाएगा।
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