कलेक्टर के निर्देश पर 120 बीघा वन भूमि अतिक्रमण मुक्त, 5 जेसीबी से चला बुलडोजर अभियान

Tuesday, July 14, 2026 - 21:12
Updated: 19 days ago
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कलेक्टर के निर्देश पर 120 बीघा वन भूमि अतिक्रमण मुक्त, 5 जेसीबी से चला बुलडोजर अभियान

जिले में शासकीय वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत आज वन परिक्षेत्र मकसूदनगढ़ के बीट खेरखेड़ा, कक्ष क्रमांक 780 स्थित लगभग 120 बीघा वन भूमि को अतिक्रमणकारियों के कब्जे से मुक्त कराया गया। अतिक्रमण हटाने के उपरांत उक्त क्षेत्र में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं पुनः वन स्थापना का कार्य किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण एवं वन क्षेत्र का संवर्धन सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि उक्त भूमि पर वर्ष 2023 में 11 अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध कब्जा किया गया था, जिनके विरुद्ध वन विभाग द्वारा नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही करते हुए बेदखली की प्रक्रिया पूर्ण की गई थी। इसके बावजूद पुनः प्रभावी रूप से भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने हेतु आज व्यापक अभियान संचालित किया गया।

कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा एसडीएम राघौगढ़ अमित सोनी के नेतृत्व में वन, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से यह बड़ी कार्यवाही संपादित की गई।

 कार्रवाई के दौरान लगभग 100 वनकर्मी, 80 पुलिस बल एवं 15 प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई। मौके पर उपवन मंडल अधिकारी इंदर सिंह धाकड़, तहसीलदार मकसूदनगढ़ डॉ. उदय सिंह जाटव, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट कमल सिंह कोली,रेंजर मकसूदनगढ़ धर्मेन्द्र शर्मा, रेंजर बीनागंज सौरभ द्विवेदी, थाना प्रभारी जामनेर मनोज मेहरा, चौकी प्रभारी उकावद रवि भिलाला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अतिक्रमण हटाने के लिए 5 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया।

कार्यवाही के दौरान कुछ अतिक्रमणकारियों द्वारा गोफन, लाठी एवं डंडों के माध्यम से अभियान में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया गया। पूर्व में भी वन विभाग के बीट गार्ड को जान से मारने की धमकी दी जा चुकी थी। किंतु व्यापक एवं सुनियोजित तैयारी, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था तथा संयुक्त बल की प्रभावी मौजूदगी के कारण किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और अतिक्रमणकारी मौके से भाग खड़े हुए।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय एवं वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा विधि के शासन की स्थापना हेतु भविष्य में भी इसी प्रकार की कठोर एवं निरंतर कार्यवाही जारी रहेगी।

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